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Monday, September 18, 2017

Comics Memories (Deepak)

Courtesy - Mr. Deepak Jangra, Group - Comics Fans Society

मित्रों जब मैं छोटा था तब मेरे पिताजी हर रविवार को दैनिक ट्रिब्यून अखबार लेकर आते थे। उस अखबार में एक 4 रविवारीय पृष्ठ होते थे। उन्ही में से एक पृष्ठ पर डायमण्ड कॉमिक्स के पात्र रमन की एक कहानी होती थी। कॉमिक्स से सर्वप्रथम परिचय मेरा इसी माध्यम से हुआ। हमारे परिवार में मेरे चाचा जी भी कॉमिक्स पढ़ते थे जो की आज भी मुझसे लेकर पढ़ते हैं। उन्ही की लाई हुई 2 कॉमिक्स घर पर पड़ी रहती थी जिनके नाम मुझे अबतक याद हैं दोनों मनोज कॉमिक्स थी। एक थी हवलदार बहादुर और चिन चिन पोटली और दूसरी थी अजगर का संसार।

मुझे आज भी याद है की जब अजगर का संसार कॉमिक्स के कवर पृष्ठ के अंदर की ओर टोटान की आगामी कॉमिक्स का कवर छपा होता था जिसमे टोटान को तो बांध रखा होता है और उसके सामने एक मकड़ी जैसा प्राणी होता है, ईसके अलावा और भी भुतहा चित्र होते हैं, उन चित्रों को जब भी मैं देखता था तब मुझे एक अलग ही दुनिया का, एक अलग ही संसार का अहसास होता था। यकीनन वो कॉमिक्स का ही संसार था, कॉमिक्स की ही दुनिया थी वो। उपरोक्त दोनों कॉमिक्स में से मैने हवलदार बहादुर और चिन चिन पोटली पढ़ी थी। उस कॉमिक्स की कहानी के मुख्य बिंदु आज भी मुझे याद हैं। बेदी जी द्वारा किया गया चित्रांकन, उटपटांग चेहरे और उन पर की गई अलग अलग रंगों से कलरिंग ने इस कदर दिलोदिमाग पर अपनी छाप छोड़ी थी की आज तक मैं उन्हें भूल नही पाया हूँ। मेरे कॉमिक्स प्रेम के प्रति मेरे घरवालों का जो नजरिया था वो बाकि कॉमिक्स प्रेमियों से अलग नही था। यानि की नजरिया नकारात्मक था। घरवालों की नजर में कॉमिक्स एक समय को बर्बाद करने वाली और पढ़ाई से दूर ले जाने वाली चीज थी। घरवालों के इसी नजरिये के कारण ही कई बार कॉमिक्स छुप कर पढ़नी पड़ती थी और छुपाकर रखनी पड़ती थी। कई बार घरवालों मेरी कई कॉमिक्स जब्त भी की जो की फिर कभी भी मुझे प्राप्त नही हुई। अब घरवालों का नजरिया पहले जैसा नही है यही कारण है मेरा कॉमिक्स कलेक्शन घर पर सुरक्षित है।

कॉमिक्स कलेक्शन की अगर बात की जाए तो बचपन में सिर्फ कॉमिक्स पढ़ने पर ही जोर दिया था मैने, क्योंकि उस समय उतने पैसे नही होते थे की अपना कलेक्शन किया जाए। फिर बीच में मैं कॉमिक्स से थोड़ा दूर हो गया था। 2014 में मैने कलेक्शन फिर से शुरू किया। मेरी पसन्दीदा कॉमिक्स कम्पनी की अगर बात की जाए तो मुझे अब तक प्रकाशित कॉमिक्स के आधार पर मनोज और राज ही सबसे अच्छी लगती हैं। राज कॉमिक्स को मैं पसन्द करता हूँ सुपरहीरोज, थ्रिल हॉरर सस्पेंस, जनरल कॉमिक्स के कारण और मनोज कॉमिक्स को उनकी नॉन हीरोज कहानियों और हवलदार बहादुर, क्रुकबांड आदि कॉमेडी करेक्टर्स के कारण। मेरे कॉमिक्स कलेक्शन में मुझे कॉमिक्स की संख्या तो पता नही है क्योंकि गिने हुये काफी दिन हो गए हैं फिर भी इतना मैं कह सकता हूँ की मेरे कलेक्शन में 1200 से ज़्यादा कॉमिक्स हैं। आज कॉमिक्स संस्कृति की जो हालत है वो उतनी अच्छी तो नही है जितनी पहले होती थी। पाठक बहुत कम हो गए हैं। बिक्री भी उसी अनुपात में घटी है। मनोज, तुलसी आदि कम्पनियाँ बन्द हो चुकी हैं। पाइरेसी ने भी कॉमिक्स इंडस्ट्री का काफी नुकसान किया है। कॉमिक्स संस्कृति के इस हाल के लिये कॉमिक्स कम्पनियों के मालिक लोग भी उत्तरदायी हैं जो वो समय के साथ नही चले। अगर समय के साथ वो कॉमिक्स को कागज के पन्नों से निकाल कर छोटे और बड़े पर्दे पर लेकर जाते तो कॉमिक्स संस्कृति की ये हालत नही होती। वैसे अभी भी देर नही हुई है। हमें आभारी होना चाहिये मित्रों राज कॉमिक्स का जो वो आज भी पाठकों की कम संख्या होने के बाद भी कॉमिक्स का प्रकाशन कर रहे हैं। और अब तो उन्होंने app बनाकर टेकनोलॉजी के साथ भी कदम मिलाकर चलना शुरू कर दिया है। जल्द ही YouTube पर हमें आदमखोर हत्यारा कॉमिक्स पर आधारित फ़िल्म आदमखोर भी देखने को मिलने वाली है। आशा करता हूँ की राज कॉमिक्स अपने इन प्रयासों से भारत में कॉमिक्स संस्कृति वही समृद्धि और वही लोकप्रियता दिलाने में सफल हो जाएगी जो कभी पहले होती थी, शायद समृद्धि और लोकप्रियता पहले से भी ज़्यादा हो जाए। हमे भी राज कॉमिक्स का सहयोग करना चाहिये। कॉमिक्स संस्कृति को समृद्ध बनाने के लिये हमे पाइरेसी का विरोध करना चाहिये और कॉमिक्स हमेशा खुद भी खरीद कर पढ़नी चाहिये और दूसरों को भी खरीद कर पढ़ने के लिये प्रेरित करना चाहिये।

Sunday, September 17, 2017

Memories (Mr. Vikas Das)


मैँ अगर पिछे मुड कर देखता हूँ तो अाज के दौर के मुकाबले में ९० का दशक मेरे जीवन का गोल्डन टाईम था, ऐक शानदार दौर जो मेरे समकालिन मित्रो ने भी जीया होगा....नब्बै के दशक मे चार चीजे आम तौर से प्रसिद्ध थी पतंग बाजी कबूतर बाजी,क्रिकेट के प्रति दिवानगी (मार्टिन क्रो, मार्क ग्रैटबैच,इमरान खान,कपील देव,रिचर्ड हैडली,इयान बाथम, डेसमंड़ हैंस आदि नाम छाया रहता था) छज्जे की आशिकी (बडे भाईयो को देखता था मोबाईल न होने के कारण हम लव लैटर सप्लायर का काम करते थे) और कॉमिक्स का क्रैज ( चाचा चौधरी राम रहिम,फौलादी सिंह काला प्रेत,शेरा,शाका पुरे रंग मे थे)....बस यही दौर था जब मेरा कॉमिक्स की दुनिया मे प्रवेश हुआ....

मुझे आज भी याद है वह दिन जब गर्मियो की छुट्टिया चल रही थी और मै अपनी बुआ के यहा "आसाम" मे था २ साल वहाँ रहने के बाद (१९८८मे वहाँ चला गया था मात्र ६ साल की आयु मे) ऐसी जीद पकडी खाना पीना छोड दिया की घर जाना है थक हार कर दादा (बंगालियो मे बडे भाई को दादा बोलते है) मुझे रुड़की ले आऐ 
रुड़की आने के करीब हफ्ता भर ही बीता होगा की ऐक रात मेरा सबसे बडा भाई प्रणब कॉमिक्स लाया जो उसने रात को पढ़ी, सुबह करीब ५ बजे कॉमिक्स पर मेरी पडी तो उतसुक्ता वश मैने पढ़नी चाही लेकिन आसाम मे रहने के कारण अंग्रैजी और बंगाली,असमिया मे पारंगत हो चुका था हिन्दी पढने मे कठिनाई होने लगी थी तो मेरे से बडे भाई पंकज ने स्टोरी पढ़नी शुरु की और मै सुनने लगा भाई क्या बवाल स्टोरी और हंस हंस कर लोट पोट करने वाली कहानी थी वह कॉमिक्स ही मेरे जीवन की प्रथम कॉमिक्स थी जो मैने पढ़ी तो नही लेकिन इसे पढ़ी हुई ही मानता हुँ! और वह कॉमिक्स थी "बांकेलाल और मुर्दा शैतान" बस इस कॉमिक्स के बाद तो मुझे कॉमिक्स पढ़ने का ऐसा चस्का लगा की छुटे नही छुटता था....नागराज की पहली कॉमिक्स जो मेरे हाथो मे आयी थी वह थी "नागराज की कब्र" नागराज की इस कॉमिक्स के बाद नागराज को और जानने की इच्छा हुई तो मैने वाकई में नागराज की कब्र ही खोद दी फिर तो नागराज का लगभग सारा कलैक्श इक्कठा कर लिया था वह दौर सिर्फ राज कॉमिक्स का ही नही था वह समय कॉमिक्स का गोल्डन टाईम था लगभग हर प्रकार की ऐडिशन की कॉमिक्स मैने पढी डायमंड,तुलसी,मनोज,दुर्गा,फोर्ट,गोयल,चुन्नू,राधा, किंग,नूतन ,पवन आदि आदि लगभग सभी कॉमिक्स पढी मेरे पसंदिदा कॉमिक्स करैक्टरो की लिस्ट हमेशा ही लंबी रही है क्योकी मैने हर तरह की कॉमिक्स पढी ! लेकिन मै हमेशा नागराज का दिवान रहा आंठवीं तक नागराज की तरह बालो स्टाईल बना स्कुल जाया करता था कई बार सुभाष सर और नरेन्द्र सर के रैपटे खाऐ पर क्या मजाल तो बाल का स्टाईल भी बिगडने दिया हो....स्कुल की किताबो के बीच में कॉमिक्स छिपाने का तरिका तो सिर्फ मुझे ही मालुम था जो अच्छो अच्छो के पकड़ मे नही आता था....

ऐक दौर मे राज कॉमिक्स ने कई प्रतियोगिता भी जारी की जिसमे मैने और मेरे भाई ने कई ईनाम की कब्जाऐ...
जिसमे से ऐक प्रतियोगिता मे मे राज कॉमिक्स ने "डोगा" की कॉमिक्स का कोई कॉमिक्स टाईटल का नाम लिख कर भेजने को कहाँ था....जिसमे से मैने दो टाईटल भेजे थे जिन पर राज कॉमिक्स वालो ने डोगा की कॉमिक्स भी छापी और वह दो कॉमिक्स थी "आखिरी गोली" और " झबरा" लेकिन तब छोटा होने के कारण चिट्ठी कैसे लिखते पोस्ट कैसे करते है का पता नही था तो मेरे भाई पंकज ने अपने नाम से पोस्ट कर दिया तो कॉमिक्स के लास्ट के पन्ने पर पंकज दास का नाम छपा और मैं मन मसोस कर रह गया हाँ ईनाम में ऐक पर्स और फाईटर टोड्स का ऐक मनी बैग मिला था जो सदैव मेरे कब्जे मे रहा अभी कुछ माह पुर्व माँ का देहांत होने पर जब माँ का बक्सा खोला तो फाईटर टोड्स का मनी बैग मिला तो वह पुरा काल मेरी आँखो के आगे घुम गया.......लेकिन अब वह रस नही रहा कॉमिक्स जगत अपनी अंतिम साँसे गिन रहा है यह सोच कर ही बदन पर सिरहन दौड जाती है....कभी रुड़की की किसी भी गली मे निकल जाते थे तो परचुन की दुकान में भी कॉमिक्स टंगी दिखाई दे जाती थी अब न कॉमिक्स है न पढ़ने वाले बच्चे.....अब जो थोड़ी बहुत कॉमिक्स छपती है उस के अंतिम पीड़ी ही हम है. लिखने को बहुत कुछ है लेकिन अब थक गया हुँ....
शायद मेरे समकालिन मित्रो की यही कहानी होगी

Tuesday, November 29, 2016

13 Days (TBS Planet Comics) Review by Rishit Tiwari


This was the second comic that I read in the first package of TBS Planet's annual subscription pack. And frankly speaking, I was as much impressed after reading this as disheartened I was after reading the Shivaay comic.

Story: Literally, this comic is one of the most decent comic I have ever read by any Indian publisher in the horror genre in terms of story. The story's fresh, interesting and very gripping. The concept's very well thought and written. Some turning points in the story make it really wroth reading and a page turner. The ending's really horrific and unexpected. I just hoped the story would have been longer(it would have been completed in one part only).

Artwork: Story and artwork plays 50-50 role in a comic book. Artwork needs to be specially well in a horror genre comic otherwise 90% of the horror will be gone. The art of this comic is really well. The inking and special effects added to the art enhances it even much more. It takes the horrific events of the story to the next level.

Rating:
Story:4/5
Artwork:4/5
Excitedly waiting for the next part.

Saturday, October 1, 2016

Results - Indian Comics Fandom Awards 2016 #ICFA_2016

List of ICF Awards 2016 winners (8 Poll based award categories)

Winners (Gold Positions)
*) - Best Cartoonist: Mrinal Rai
*) – Best Fan Artist: Anuj Kumar
*) - Best Blogger-Reviewer: Youdhveer Singh
*) - Best Fan Work: Doga Song (Warwan Band)
*) - Best Fanfiction Writer: Adesh Sharma
*) - Best Comic Collector: Sagar Jung Rana
*) - Best Webcomic: The Beast Legion (Jazyl Homavazir)
*) - Best Colorist (2) - Naval Thanawala, Nishant Maurya


Silver Positions (Runner-ups)
*) - Best Cartoonist: Jazyl Homavazir
*) – Best Fan Artist: Amitabh Singh
*) - Best Blogger-Reviewer: Jagmeet Sidhu
*) - Best Fan Work: Shaktimaan is Back Video (DK Films, 60 Hertz Studios)
*) - Best Fanfiction Writer: Bramha Patel
*) - Best Comic Collector: Manoj Pandey
*) - Best Webcomic: Kavya Comics (Mohit Trendster)
*) - Best Colorist - Harendra Saini


Bronze Positions (Rank #03)
*) - Best Cartoonist: Neerad
*) – Best Fan Artist: Anand Singh
*) - Best Blogger-Reviewer: Ashwani Dwivedi
*) - Best Fan Work (2): Comics Memories Podcast Series ( Mohit Trendster), Roar of Indian Superheores Series (PK Brothers)
*) - Best Fanfiction Writer: Navneet Singh
*) - Best Comic Collector: Heera Lal Bhardwaj
*) - Best Webcomic: The Last Ancients (Akshay Katnaur)
*) - Best Colorist: Manabendra Majumder


Indian Comics Fandom Awards 2016 Album 


Saturday, November 28, 2015

Character Bio

Info about couple of Indian Origin Characters in DC Comics

Aruna is a fictional supeheroine published by DC Comics. She first appeared in Batgirl Annual # 1 (August 2000), and was created by Scott Peterson and Mike Deodato. Aruna is a metahuman who can change her physical shape and appearance at will, but not her mass. She is also trained in the martial arts. Aruna uses these abilities to work as a stunt double.
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Celsius is the superhero alias of Arani Desai, a fictional character in the DC Comics series, Doom Patrol. She first appeared in Showcase #94 (September 1977), and was created by Paul Kupperberg and Joe Staton. She is among the very few superheroes of South Asian heritage, and may be the first ever such hero created by DC Comics.
‪#‎indiancomics‬ ‪#‎comics‬ ‪#‎character‬ ‪#‎info‬ ‪#‎Celsiuscomics‬

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*) - Inspector Steel 

Inspector Amar lost some major parts of his body after an accident. In order to save his life, his brain was placed into a mechanical body; making him a cyborg. His friend, Professor Anees, was the one who performed this operation.

Inspector Steel is composed of armor plating, ICs, chips, various weapon systems, and electronic wizardry. The only human part within him is his brain, which is wired to the rest of the systems.

He is a heavily armored cyborg who cannot be harmed by simple weapons. He has x-ray vision, a fully automatic bullet and rocket firing Megagun, scanners and many digital equipments such as a lie detector machine, fax etc. built in. Normal bullets and bombs can not harm him. His body is completely resistive to any outside interference.

Saturday, September 19, 2015

Artist Gaman Palem


Gaman Palem an Indian comic book illustrator. He has illustrated more than 100 Indian children's comics, working mainly on mythological subjects.

Education in Mass Communication took Gaman Palem, Chennai, to procure a doctorate degree in the same subject from the Madurai Kamaraj University, Tamil Nadu. However, Palem’s mind was not glued to academics. A true graphic visualizer and an avid follower of graphic novels from all over the world, Palem decided to set sails into the larger ocean of graphic visualizing and today he is one of the highly acclaimed graphic designers and an artist who uses graphic novel format as a medium to express his ideas. With a deep understanding of Indian mythologies as well as their regional versions and interpretations, Gaman Palem makes use of his knowledge for creating a series of works that blend the mythical characters to contemporary contexts.

Gaman's first series of eight picture books, The Golden Mythology Series, won the National Award for Excellence in Printing Children's Books. Gaman Palem worked at Loyola College of Education in Chennai, Tamil Nadu, was a visiting faculty at Raffles College, a creative consultant in many publishing houses and animation studios.

He became interested in comics at a very young age of two. Later, it just became a passion.

He also works in 3D animation, but is more interested in creating graphic novels and comics. Gaman's artistic style is influenced by Indian iconography, combining the traditional illustration techniques of watercolour, pen and ink with modern digital techniques. His debut art show was in September at The United Art Fair 2012. An exhibition on Freedom to March with Ojas Gallery 2013, New Delhi, where he interpreted Mahatma Gandhi, Dandi march, in his unique graphic novel format and in Punebiennale 2015 with 'Swachh Bharath' in his own unique graphic narrative manner. Gaman Palem lives and works in Chennai. His works have been published in major graphic magazines, journals and he has exhibited widely in India. 

Friday, September 18, 2015

Call for Entries - ICF # 09

इंडियन कॉमिक्स फैंडम पत्रिका के आगामी वॉल्यूम # 09 के लिए कॉमिक्स - ग्राफ़िक नोवेल्स संग्राहक मित्रों द्वारा निम्नलिखित विषयों में से किसी एक पर लेख, संस्मरण आमंत्रित है।
*) - मेरे कॉमिक्स संग्रह की कहानी।
*) - एक संग्रहकर्ता के रूप में मेरे लिए सबसे अच्छा वर्ष। 
*) - भारतीय कॉमिक्स के "गोल्डन ऐज" दौर की यादें। 
*) - आपकी कल्पना से कैसा होगा भारतीय कॉमिक्स और उनके कलेक्टर्स का भविष्य?

अगर आप चाहें तो एक से अधिक विषयों का समावेश कर एक लेख बना सकते है। पत्रिका में प्रकाशन हेतु लेखों के चयन का अधिकार प्रकाशक का है। अपने लेख आप letsmohit@gmail.com पर ई-मेल करें या इंडियन कॉमिक्स फैंडम पेज पर मैसेज करें। धन्यवाद!

Wednesday, August 5, 2015

Popular Bengali Comics Series


*) - Nonte Phonte is a Bengali comic-strip (and later comic book) creation of Narayan Debnath which originally was serialized for the children's monthly magazine Kishore Bharati. The stories featuring in the comic strips focusses on the trivial lives of the title characters, Nonte and Phonte, along with a school-senior, Keltuda, and their Hostel Superintendent. The comics have appeared in book form and have been recreated since 2003 in colour. A popular animation series based on the characters has also been filmed. #comics #bengali#indiancomics


*) - Batul the Great (Bengali Comics) ‪#‎Indiancomics‬ ‪#‎comics‬ ‪#‎bangla‬ ‪#‎batul‬

Tuesday, July 7, 2015

ICF Updates

*) - Indian by Choice, Graphic Novel by Amit Dasgupta 

*) - Nirmala and Normala (Graphic Novel, Penguin Books India) by Sowmya Rajendran and Niveditha Subramaniam


"Nirmala and Normala are twins separated at birth *dramatic music*. While one goes on to become a heroine, the other goes on to become a normal person. Yes, we know we should put ‘normal’ in quotes. We also know that we should issue a disclaimer that there’s no such thing as normal, but really, let’s talk about that later. If you’ve ever sat through a movie wondering why in the world the heroine is playing with street children or why she seems so daft despite being Harvard-educated, you should listen to Nirmala’s story. As for Normala, well, we all know her, don’t we?"

Tuesday, May 5, 2015

सदाबहार परशुराम शर्मा जी से मेरी मुलाक़ात....


जीवन में कई बार छोटी-छोटी बातें आपको चौकाने का दम रखती है, बशर्ते आपकी आदत या किस्मत ऐसी बातों को देख सकने कि हो। भाग्य से कुछ सामान खरीदने बाजार गया और बाइक स्टैंड पर लगाते समय क्रिएटिव कोर्सेज का एक पोस्टर दिखा जिसपर एक नाम को पढ़कर लगा कि यह तो कहीं अच्छी तरह सुना लग रहा है पर उस समय भाग-दौड़ में याद नहीं आ रहा था कि कहाँ। पोस्टर पर एक संजीदा बुज़ुर्ग गिटार पकडे  खड़े थे। खैर, सामान खरीदते समय याद आया की पोस्टर पर लिखा नाम परशुराम शर्मा तो बीते ज़माने के प्रख्यात उपन्यास एवम कॉमिक्स लेखक का भी था। साथ में यह भी याद था कि परशुराम जी का पता मेरठ का बताया जाता था। इतना काफी था इस निष्कर्ष पर आने के लिए कि सामने लेखक-विचारक परशुराम शर्मा जी का ही ऑफिस है। पहले तो मैंने भगवान जी को धन्यवाद दिया कि उन्होंने बाइक जिस एंगल पर स्टैंड करवाई वहां से मुंडी टिल्ट करके थैला उठाने में मुझे सर का पोस्टर दिख गया। थोड़ी झिझक थी पर मैंने सोचा कि अब इतनी पास खड़ा हूँ तो बिना मिले तो नहीं जाऊँगा। उनसे बड़ी सुखद और यादगार भेंट हुई और काफी देर तक बातों का सिलसिला चलता रहा, इस बीच उन्होंने अपने सुन्दर 2 गीत मुझे सुनाये और बातों-बातों में मेरे कुछ आइडियाज पर चर्चा की।


270 से अधिक नोवेल्स और कई कॉमिक्स प्रकाशनों के लिए सौइयों कॉमिक्स लिख चुके 68 वर्षीय परशुराम जी अब मेरठ में अपना क्रिएटिव इंस्टिट्यूट चलाने के साथ-साथ स्थानीय म्यूजिक एलबम्स,  वीडिओज़ बनाते है। बहुमुखी प्रतिभा के धनि परशु जी लेखन के अलावा गायन, निर्देशन, अभिनय में भी हाथ आज़मा चुके है और अब तक उनकी लगन किसी किशोर जैसी है। यह उनके साथ हुयी भेंट, कुछ बातें उनके आग्रह पर हटा ली गयी है। 


*) - दशको तक इतना कुछ लिखने के बाद आपके बारे में पाठक बहुत कम जानते है, ऐसा क्यों?
परशुराम शर्मा - बस मुफलिसी का जीवन पसंद है जहाँ मैं अपनी कलाओं में लीन रहूँ। वैसे उस वक़्त अचानक सब छोड़ने का प्लान नहीं था वो हिंदी नोवेल्स, कॉमिक्स का बुरा दौर था इसलिए अपना ध्यान दूसरी बातों पर केंद्रित किया। 

*) - अब आप क्या कर रहे है?
परशुराम शर्मा - अब भी कला में लीन हूँ। बच्चो को संगीत और वाद्य सिखाता हूँ, डिवोशनल, रीजनल एलबम्स-वीडिओज़ बनाता हूँ। कभी कबार स्थानीय फिल्मो में अभिनय करता हूँ। 68 साल का हूँ पर इन कलाओं  सानिध्य में हमेशा जवान  रहूँगा। 

*) - क्या नोवेल्स-कॉमिक्स के ऑफर अब तक आते है आपके पास?
परशुराम शर्मा - कुछ प्रकाशक अब भी मुझसे हिंदी नावेल सीरीज लिखने की बात करते है पर अब इस फील्ड में पैसा बहुत कम हो गया है। युवाकाल जैसी तेज़ी नहीं जो वॉल्यूम बनाकर  मेहनताने भरपाई कर सकूँ। इतना दिमाग लगाने के बाद अगर  पारिश्रमिक ना मिले तो निराशा होती है। अखबार वाले मुझे लेखो के 200-300 रुपये  चैक देते थे और पूछने पर बताते कि लोग तो फ्री में लिखने को तैयार है, हम तो फिर भी आपको कुछ दे रहे है। 

*) - अब किन पुराने साथियों के संपर्क में है?
परशुराम शर्मा - कभी कबार कुछ मित्रों से बातचीत हो जाती है। यहाँ स्थानीय कार्यक्रमों में वेदप्रकाश शर्मा जी, अनिल मोहन आदि उपन्यासकारों से भी मिलना हो जाता है। 

Parshuram ji in T Series Video

*) - क्या अंतर है पहले और अब कि ज़िन्दगी में?
परशुराम शर्मा - पहले जीवन की गति इतनी तीव्र थी कि ठहर कर कुछ सोचना या अवलोकन कर पाना कठिन था। आजकल कुछ आराम है तो वह भागदौड़ में रचनात्मकता किसी सुखद फिल्म सी आँखों के सामने चलती है। 

*) - आपके लिए कुछ सबसे यादगार पल बांटे। 
परशुराम शर्मा - ऐसे बहुत से लम्हे आये जब मुझे विश्वास ही नहीं हुआ अपने भाग्य पर। जो अब याद है उनमे जैकी श्रॉफ का मेरे साथ फोटो खिंचवाने के लिए लाइन में लगना , अमिताभ बच्चन जी का मुझसे मिलने पर यह बताना कि मेरे लेटेस्ट उपन्यास की 5 कॉपीज़ उनके पास रखी है, प्रकाशकों का मेरी कई कृतियों के लिए लड़ना आदि। 

*) - इंटरनेट के आने से क्या बदलाव महसूस किये आपने?
परशुराम शर्मा - ज़्यादा तो मैंने सीखा नहीं पर कुछ वर्ष पहले जिज्ञासावश अपना नाम सर्च किया तो बहुत कम काम था मेरा वहां। मैं कुछ प्रशंषको का धन्यवाद देता हूँ जिन्होंने जाने कहाँ-कहाँ से खोजकर मेरी कई कॉमिक्स और उपन्यासों की लिस्टस, चित्र आदि इंटरनेट पर अपलोड किये। सच कहूँ तो अब उनमे से काफी काम तो मैं भूल चुका हूँ  कि वो मैंने ही लिखे थे।  

*) - आपके ऑफिस के बाहर कुछ पोस्टर्स और भी लगे है उनके बारे में बताएं? 
परशुराम शर्मा - एक पोस्टर कुछ समय पहले आई फिल्म "देसी डॉन" का है, कुछ एलबम्स साईं बाबा पर रिलीज़ हुयी पिछले 3 वर्षों में। 

*) - लेखन, संगीत, अभिनय, निर्देशन आदि विभिन्न कलाओं में ऐसी निरंतरता, दक्षता कैसे लाते है आप?
परशुराम शर्मा - इसका उत्त्तर मेरे पास भी नहीं है, शायद इन कलाओं के प्रति मेरा दीवानापन मुझे रचनात्मक कार्य करते रहने को प्रेरित करता है। 

*) - भविष्य कि योजनाओं और प्रोजेक्ट्स से अवगत करायें। 
परशुराम शर्मा - कुछ होनहार बच्चो को संगीत में लगातार शिक्षा दे रहा हूँ, उनमे एक ख़ास हीरा तराशा है जिसका नाम है अंश। उसके साथ साईं बाबा पर डिवोशनल एल्बम अक्टूबर 2014 में लांच की, अब वह कुछ टैलेंट शोज़ के ऑडिशंस दे रहा है। बहुत जल्द आप उसे टीवी पर देखेंगे। नयी पीढ़ी के प्रति  दायित्व निभाने के साथ - साथ जीवन में सोचे ख़ास, चुनिंदा आइडियाज को किस तरह अलग-अलग माध्यमो में  मूर्त रूप दूँ यह सोच रहा हूँ। 

Master Ansh

*) - कॉमिक्स पाठको को क्या संदेश देना चाहेंगे? क्या हम आपका नाम दोबारा कॉमिक्स में देखने की उम्मीद कर सकते है। 
परशुराम शर्मा - मैं उनका आभार प्रकट करूँगा जिन्होंने इस मरती हुयी इंडस्ट्री में जान फूँकी। काल बदलते है, इसलिए चाहे बदले प्रारूपों में ही सही कॉमिक्स का सुनहरा समय फिर से आयेगा। जी हाँ! आगे दोबारा मैं कॉमिक्स लिख सकता हूँ अगर परिस्थिति सही बनी तो। 

इस तरह उनका धन्यवाद करता हुआ, आशीर्वाद लेकर फूल के कुप्पा हुआ मैं उनके ऑफिस से बाहर निकला। जल्द ही उनकी अनुमति लेकर जो गीत उन्होंने मुझे सुनाये थे वो अपलोड करूँगा। 

- मोहित शर्मा (ज़हन) 
#mohitness #mohit_trendster #freelance_talents

Saturday, April 25, 2015

Comic Fan Fest # 03 (19 April, 2015)

Comic Fan Fest # 03 (19 April, 2015)
दिल्ली में आयोजित कॉमिक फैन फेस्ट अप्रैल 2015 धमाकेदार इवेंट का हिस्सा बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। एक के बाद एक इतना सब था इस इवेंट में कि समय का पता ही नहीं चला जिसके लिए एक बार फिर से दीपक चौहान, आकाश मोहनीश बधाई के पात्र है। बैज, केक, गिफ्ट्स आदि में काफी बारीकी से सोचा गया और सोच को मूर्त रूप देने के लिए हफ्तों की मेहनत की गयी। राज कॉमिक्स पर आकाश द्वारा बनायीं गयी एंड्राइड एप, मेहमान कलाकारों द्वारा बनाये गए चित्र बेहतरीन थे। प्रदीप शेरावत जी, जगदीश कुमार जी और जय खोहवाल भाई के अलावा इस बार ललित शर्मा जी ने आयोजन की रौनक बढ़ाई। मैं धनंजय, अभिमनु, आयुष और नितिन मुंजाल जी से पहली बार मिला। लोकेश, संजय और अयाज़ ने मुझे कॉमिक्स, किताबें और पोस्टर गिफ्ट में दिए । इस अवसर पर मेरी लिखी शार्ट फिल्म बावरी बेरोज़गारी भी आयोजको के सौजन्य से चली। शिवांक द्वारा विभिन्न हस्तियों की मिमिकरी और आयुष का एक्ट मनोरंजक थे। बीच में सभी के अलग-अलग मुद्दो पर गंभीर पर रोचक संवाद हुए। सदाबहार रवि भाई और शुभांकित बिना मंच पर आये ही अपनी बातों-कमेंट्स से सबका मनोरंजन कर रहे थे।
Ravi Yadav, Jai Khohwal and Pradeep Sherawat
अंत में यही कहूँगा कि यह आयोजन पिछले वर्ष दिसंबर कॉमिक फैन फेस्ट के आयोजन से बेहतर था, आगे यह उम्मीद करता हूँ कि कॉमिक फैन फेस्ट और बड़े स्तर पर पहुँचे, सदस्यों एवम आयोजको की मेहनत और योजनाएँ देखकर लगता है ऐसा ज़रूर होगा।
- मोहित शर्मा (ज़हन) 

Friday, April 10, 2015

ICF Community Updates

*) - The India Army is in talks with comic book publishers to create a "Warrior Series" depicting the life of men in uniform who have performed extraordinary deeds while fighting for the country.
While Indian War Comics already have a series on bravehearts of the force, the Army has been getting requests from different comic book publishers. This is in addition to the Central Board of Secondary Education's plan to introduce supplementary study material for Classes IX to XII on unsung war heroes of the Army, Navy and Air Force.

*) - ‪#‎Crowdfund‬ campaign - Sintuics, India's First 3D Comic on Environment by Saurabh Pacheriwala and Anushree Poddar. You can either fund them or help-support them spread the word. For more details -https://www.wishberry.in/campaign/sintuics-3d-comics/ 


*) - Randomiya Poster (Raham Baba with Habibiya and Bijuriya)


*) - Popular Yesteryear Hindi Comics Script Writer Mr. Haneef Azhar



*) - Page from Express Comics #express_comics #india

Wednesday, April 8, 2015

ICF Community FB Updates

*) - Article on Cartoonist काक (Kaak)

*) - 9 Indian Comics We Found At Comic Con With Mythology, Sci-Fi, Humour And More (By Gayathri Naga for Polkacafe.com)
What comes to your mind when we say Indian comics? Maybe the witty Chacha Choudhry? The Tinkle Digest that you read as a kid on train journeys? Or perhaps it's the good old Amar Chitra Katha. Indian comics are so much more than these few names. With an interesting blend of mythology, sci-fi and everyday concerns – Indian comics are back with a bang! Here is a list of Indian comics that every comic lover must read. Read Full Article - http://www.polkacafe.com/indian-comics-from-comic-con-2015-1149.html


*) - Legendary author, cartoonist, journalist & environmentalist 79 years young Mr. Aabid Surti, recipient of the 5th Comic Con India Lifetime Achievement Award ‪#‎comics‬ ‪#‎india‬ ‪#‎aabid_surti‬


*) - Artist - Mitali Panganti