Wednesday, September 15, 2021

भारतीय कॉमिक्स में नेपाल


कहानियों में जब विश्व-भ्रमण या एडवेंचर की बार आती है, तो हम अक्सर अमेरिका-यूरोप और कुछ किरदारों के लिए अफ़्रीका तक सिमट कर रह जाते हैं। इस क्रम में हम कुछ देशों को भूल जाते हैं (या शायद विदेश मानते ही नहीं)। जैसे कि हमारा पड़ोसी और खास संस्कृति, अलग पहचान वाला नेपाल। वहां के अपने कई किस्से, किवदंतियां प्रचलित हैं जिन्हें कहानियों में पिरोया जा सकता है, लेकिन यहां घर के बगल की मुर्गी भी दाल बराबर होने की वजह से नेपाल को लगभग अनदेखा किया गया है। एक उदाहरण देता हूं, वैसे तो यह एक दुखद घटना है पर माफ़ी के साथ इसे यहां लिख रहा हूं। 
1 जून 2001 को, नेपाल राजघराने के कई सदस्यों की हत्या कर दी गई, इसमें राजकुमार दीपेंद्र को दोषी माना गया, लेकिन कई लोग ऐसा मानते हैं कि ये हत्याएं राजगद्दी के लिए आंतरिक साजिश या चीन, अमेरिका या भारत जैसी बाहरी ताकतों के इशारों पर हुईं। Conspiracy theories की मानें, तो जिस महल में हत्याएं हुईं वहां राजकुमार दीपेंद्र का मास्क पहने कई लोग गोलियां चला रहे थे, बल्कि दीपेंद्र को सबसे पहले गोली लगी थी। इससे काफ़ी पहले राजकुमार दीपेंद्र एक अन्य राजघराने की देवयानी राणा से शादी करना चाहते थे, लेकिन दीपेंद्र के परिवार के लोग इसके विरुद्ध थे। इस वजह से यह हत्याकांड हुआ।
एक किवदंती यह भी है कि 10-11 पीढ़ी पहले नेपाली राजा जंगल में घूम रहे थे जहां किसी बात पर एक ऋषि ने उन्हें श्राप दिया कि 10 पीढ़ियों बाद तुम्हारा राज और वंश ख़त्म हो जाएगा। नेपाल की ऐसी ही कितनी बातें हमें पता ही नहीं, लेकिन हमें तो ऑब्वियस कांसेप्ट को इतनी बार दोहराना है जब तक वह घिस न जाए। 
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इस बारे में नेपाल के ही शरद बताते हैं - "
एक बार नेपाल के एक मंदिर का गजुर चुराने वाला सिन एक कमिक्स मे आया तो था, लेकिन जैसे आपने कहाँ, यहीं पर आधारित कहानी नही बुनि गई शायद। जिस किस्सों का जिक्र आपने किया, उसमे ये भविष्यवाणी कि गई थी कि नेपाल का शाह वंश राजतन्त्र ’क’ अक्षर से शुरू हुवा है, प्रथम राजा का नाम कुल्मन्दन शाह था, और ये देवनागरी लिपि के आखिरी अक्षर से समाप्त हो जाएगा, यानी कि ’ज्ञ’ से, ये बात बहुत पहले से प्रचलित थी। और हुआ भी ऐसा ही, ज्ञानेन्द्र शाह आखिरी राजा साबित हुए। राजदरबार हत्याकाण्ड के बारे मे जो आपने लिखा है, बिल्कूल वैसे हि लोग दो भाग में बंटे हुए है अब तक। कमिक्स से मिलता जुलता कहानी हम बचपन से सुनते आए है, हमारे यहाँ बाबा गोरखनाथ का मंदिर भी है, वो गुरु थे राजा पृथ्वी नारायण शाह के। एक बार उन्होंने झूठी दहि राजा को दिया और खाने को कहा। लेकिन राजा ने खाने के बजाए नीचे फेक दिया, जो खुद अपने पैरों पर पड़ी। तब गुरु गोरखनाथ ने कहा, अगर दहि खालेते तो जो तुम बोलते वो सच् हो जता, लेकिन अपने पैरों पर दहि डाल लिया तुमने, खैर, अब जहाँ जहाँ तुम्हारे पैर पड़ेंगे वो तुम्हारी हो जाएगी। और हुवा भी वैसे हि, राजा पृथ्वी नारायण शाह ने छोटे छोटे राज्यों पर जीत हासिल करके बिशाल नेपाल का निर्माण किया। किवदंतियों से बाहर भी आतंकबाद के खिलाफ कि प्लट के लिए देखा जाए तो ११ साल यहाँ आन्तरिक द्वंद  उत्कर्ष पर था। इसके साथ्सा-थ्, सब लोग स्विट्ज़रलैंड को तो देखते हि है, पर बहुत कम लोग जानते है नेपाल खुद एशिया का स्विट्ज़रलैंड कहलाता है। सिद्धार्थ गौतम जो बाद मे गौतम बुद्ध बने, वो यहीं पैदा हुवे, राजा जनक और सीता यहि पैदा हुवे, माउण्ट एभरेस्ट यहीं पर है। तो जो आप ने कही है, बिल्कूल सहि पक्डे है, दिया के नीचे अन्धेरा। यहाँ के प्लट पर भी अच्छी कमिक्स कहानी बनसक्ति है, mythology, geographic, historic, or general, whichever be the area of story.
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कुछ मुख्य कॉमिक्स जिनमें नेपाल का बैकड्रॉप था या नेपाली किरदार थे -
रूहों का शिकंजा (सुपर कमांडो ध्रुव)
बौना शैतान (नागराज)

Sunday, February 21, 2021

Info - Indian Webcomic Competition (2021)

If you truly believe in the India bring manga movement, truly want the Indian comic space to be equivalent to the Korean/Japanese ones, we need to encourage as many Indian artist as we can to pick up the brush and become a comic artist.

This competition aims to remove the initial inhibition of "I cant create comic" and pushes to encourage Indian artists to turn to Indian comic creators.

Please register at https://bit.ly/IWC2021 , or visit the link https://bit.ly/IWC2021post for more details.

You can find the last editions winners at https://bit.ly/IWCInstagram

Monday, February 15, 2021

Manipur's first Comic Book - Folktales of Mao, Maram and Poumai

 मणिपुर की पहली कॉमिक - वहां की 3 जनजातियों की लोककथाओं पर आधारित - "Folktales of Mao, Maram and Poumai"

Manipur's first comic book on folktales of three tribes released, Total pages - 135. Author - Th Kirankumar, deputy commissioner of Senapati, with inputs provided by literature societies of the three major tribes.

#comics #manipur #india #indiancomics #art #northeast #northeastindia

Monday, January 11, 2021

Comics art workshop for beginners 2021

 

COMICS ART WORKSHOP FOR BEGINNERS

ORGANISED BY COMIX THEORY

EXTENSIVE 8 HOUR SESSIONS,

DATE: 14TH & 15TH JANUARY 2021

TIME: 1: 00 PM- 5:00 PM,

VENUE: ONLINE CLASSES (LINKS WILL BE PROVIDED TO REGISTERED PERSONS )

**** WITH CERTIFICATES FROM COMIX THEORY ****

TOPICS :

1. PORTRAIT & FACE DRAWING TIPS & METHODS WITH DEMO – BY RAVI SHANKAR (1 PM TO 2 PM )

2. DRAWING WITH PEN & INK: TIPS & DEMO BY SHIVANSH RAO (2PM TO 3 PM )

3. CARTOONS: BASICS & STYLE –BY MURSHID ALAM (3 PM TO 4 PM )

4. COMICS PIN UPS: ANATOMY, STYLE & COMPOSITION – BY SHAMBHU NATH MAHTO (4 PM TO 5 PM )


**SUBJECT COVERS SPECIFICALLY **

- DRAWING FACE STRUCTURE WITH REALISM

- DIRECT DRAWING WITH REFEREENCE AND WITHOUT REFERENCE

- DEVELOPING ART STYLE ELEMENTS IN CARTOON OR IN REALISTIC STYLE

- PIN UPS COMPOSITION

- CORRECTING ANATOMICAL ERRORS

- DEVELOPING OVERALL PRESENTATION OF ART

- TIPS FOR INCREASING PARTICULAR DRAWING SKILLS IN FASTER THAN FLASH

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FULL WORKSHOP REGISTRATION FEE: 2000 RS /ONLY

*** EARLY BIRD OFFER: REGISTER ON 11 TH & 12 TH JANUARY AND GET FULL WORKSHOP PACKAGE IN 1000 RS ONLY WITH SURPIRSE COMICS GIFT+ REALISTIC OR SIMPSON STYLE PORTRAIT WORTH 1500 RS WITH IT!! THIS OFFERAVAIALBLE IN LIMITED NUMBERS! GRAB IT FIRST!!***

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NOTE: FOR REGISTRATION FEE AND EARLY BIRD OFFER DETAILS CONTACT US!

FOR REGISTRATION CONTACT: + 91-9716960402, 8920075126

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Moorkhistan special


Enjoy Moorkhistan on Tata Sky comedy channel or on their YouTube channel.

Sunday, January 10, 2021

नीरद जी का डायमंड कॉमिक्स का सफर

 कैसे आया था डायमंड कॉमिक्स में!

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क्या दौर था वह....हर तरफ दौड़ता ही रहता था! 1978 से 1983 तक की होगी बात। पोलिटिकल कार्टून भी बनाता था, सारे अखबारों के लिए चित्रकथाएं भी बनाता था। दौड़ आकाशवाणी की भी लगाता था, पहले 'घरौंदा', 'बाल मंडली' फिर 'युववाणी'! लघु पत्र-पत्रिकाओं  'हुंकार', 'नव बिहार', 'वैशाली', 'पहुंच' और ऐसे दर्जनों प्रकाशनों के लिए मुफ्त में लिखता-छपता। उनके स्तंभों के लिए लकड़ी के ब्लॉक भी बनाता। कवि गोष्ठियों में भी भाग लेने का दांव नहीं छोड़ता। राष्ट्रीय स्तर की बड़ी पत्रिकाओं के लिए छोटे कार्टून बनाता, खूब! क्रिकेट और पढ़ाई तो थी ही...

कहीं फ्री कहीं सपारिश्रमिक! पूरा धुरंधर था। छूटे न कुछ, यही सवाल था।😊

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पटना में ऐतिहासिक बाल पत्रिका 'बालक' पुस्तक भंडार, हिमालय प्रेस से छपती थी। बहुत अच्छी थी पत्रिका, लेकिन वर्षों से प्रकाशन बंद है। कभी आचार्य शिवपूजन सहाय उसके संपादक थे।

'बालक' का मैं परमानेंट क्रिएटिव सप्लायर था😊 पूरी पत्रिका में मैं ही दिखूं इसका उपाय कर लिया था मैंने। तब 'बालक' में मेरी कई चित्रकथाओं के साथ एक चित्रकथा छपती थी- 'चिम्पू'...नियमित तौर पर! तब एक पेज के 35 रुपये मिलते थे भाई!

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एक बार मैं 'चिम्पू' लेकर गया, तो आदरणीय संपादक श्री सीताशरण सिंह (उनका विशेष स्नेह था मुझ पर🙏) थोड़े परेशान दिखे। छूटते ही कहा मुझसे, "नीरद, चिम्पू बंद कर दो! तुरंत!...अब नहीं छपेगा ये!"

मेरे तो होश उड़ गए! 35/- का घाटा!🙄

फिर संपादक जी दिखाए एक पत्र.. बोले," देखो, ये डायमंड कॉमिक्स दिल्ली वालों की चिट्ठी आयी है। ये चिम्पू उनका कॉपीराइट है। उन्होंने चिम्पू को फौरन बंद करने कहा है। अरे बंद कर दो भाई! कौन पड़ेगा इस केस-मुकद्दमे में!"

मैं तो इतना कुछ न समझा, न समझना चाहा। मुझे तो 35 रुपये की चिंता थी🤔...

खैर! बंद हो गया, चिम्पू, मगर वह मुझे बहुत बड़ा माइलेज दे गया! ☺️बताता हूँ...

Neerad ji receiving National Award for Science Communication 2007 from Mr. Kapil Sibal

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1982 या 1983 होगा। सोचा, चलूं दिल्ली। टारगेट था, डायमंड कॉमिक्स। पैसे कहाँ से आएंगे? तो बैंक में 4 अकॉउंट थे। सबको सीधा बंद कर दिया। कुल जमा हुए तकरीबन 600/- । अपने बड़े भैया को लिया और 600 में पटना दिल्ली का प्रबंध हो गया। ट्रेन थी खटारा 11up/12Dn (अपर इंडिया एक्सप्रेस)। एक खराब टाइप का मोटा ब्रीफकेस था। उसमें कपड़ा, साबुन, तौलिया, चप्पल, ब्रश जीभी और उसी में  छपी किताबें लेकर चला। विजिटिंग कार्ड के नाम पर कार्ड बोर्ड को छोटा-छोटा काटकर उसपर अपना नाम-पता का मुहर मार लिया था।

पिताजी मधुबनी में थे, डिस्ट्रीक्ट जज। उनसे एक पैसा नहीं लेने की खुशी थी, तो उन्हें मेरे द्वारा पैसे नहीं मांगने की खुशी थी। साथ था, तो उनका आशीर्वाद! वह भी खूब सारा!🙏🌸

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पुरानी दिल्ली पहुंचा। ठहरने की जगह तय थी पहले से।

मैं वही वाला ब्रीफकेस लेकर 2715, दरियागंज में डायमंड कॉमिक्स के आफिस पहुंचा। वहां मैनेजिंग डायरेक्टर श्री नरेन्द्र कुमार वर्मा जी से मिला। उन्हें तीन बातों से आपत्ति थी...एक,  बिहार से कोई कार्टूनिस्ट कैसे हो सकता है? दूसरा, इतना छोटा लड़का इतनी शुद्ध हिंदी कैसे बोल सकता है? और तीसरा, मेरी 'बालक' में प्रकाशित अंतरिक्ष विज्ञान की चित्रकथा 'निकोलस' को वह मानने के लिए तैयार नहीं थे कि वह मेरी बनाई हुई है! उनका कहना था कि तुमने विदेशी कॉमिक को कट पेस्ट कर यह चित्रकथा तैयार की है! दरअसल, वह चित्रकथाएं फ़्लैश गॉर्डन से प्रभावित थीं।

उन्होंने कहा, "बनाकर दिखाओ!"

मैं ब्रीफकेस से बनाने के लिए कागज निकालने लगा, कि इसी में कभी ब्रश जीभी गिर जाते तो कभी साबुन। उन्हें यकीन हो गया कि बिहार से कार्टूनिस्ट नहीं कार्टून जरूर आया है!☺️

मैंने बना दिया फटाफट सामने। वह खुश हो गए। बोले, ''जाओ, हमारे भाई साहब हैं, गुलशन राय। वही बताएंगे कि काम क्या मिलेगा!" और उन्होंने उनका विजिटिंग कार्ड पकड़ा दिया।

मैं थैंक यू बोलकर चला वहां से। हालांकि बाद में पता चला कि वहां मेरा साबुन गिरकर छूट ही गया। साबुन का नाम था- 'लक्स'!

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257, दरीबा कलां। तब यहीं बैठते थे श्री गुलशन राय। डायमंड कॉमिक्स के संपादक थे, अभी भी हैं। बहुत विनम्र और खुशमिजाज! उन्हें जब मालूम हुआ कि मैं पटना से वही कार्टूनिस्ट आया हूँ, जो 'बालक' में चिम्पू बनाता था! और जिसे उन्होंने कॉपीराइट का लेटर भेजकर अविलंब बंद करवाया था। फिर क्या था, वह इतने खुश हुए कि पूछिये मत! मुझे माइलेज मिल गया था!!

फ़ौरन गुलशन जी ने मुझे हर महीने 12 पेज चित्रकथा बनाने का ऑफर दे डाला, 'पलटू' नाम की एक शीघ्र प्रकाश्य पत्रिका के लिए! 50 रुपये पर पेज, यानी 600 रुपये महीना। आने-जाने के 600/- का इन्वेस्टमेंट हुआ था, शुक्र है वह सार्थक हो गया था। 

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डायमंड कॉमिक्स से मेरा जुड़ना मेरी चित्रकथा यात्रा का एक गौरवशाली इतिहास है। मैने वहां लोकप्रिय चित्रकथा श्रृंखलाओं के तकरीबन 200 पुस्तकबद्ध कॉमिक बनाई (मेरे संग्रह में उपलब्धता के आधार पर)।

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मैं अपने तमाम पाठकों, प्रशंसकों के साथ श्री गुलशन राय की रहनुमाई का दिल से आभारी हूँ!

🌸🙏❤️