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Monday, January 3, 2022

ACK Title Shortlisted - PragatiE Vichaar Literature Festival

 

#Shortlisted #Update Amar Chitra Katha's title Valiant Women has been shortlisted in the Top 5 Best Non-Fiction books at the PragatiE Vichaar Literature Festival - Author Excellence Awards. Heartiest congratulations to the authors, Surekha S. and Nandini Nayar. Valiant Women tells the inspirational stories of the bravehearted women who fought for the freedom of our country. Show your love for Amar Chitra Katha and this title by visiting the link below and voting!

https://bit.ly/VoteValiantWomen

#ACK #ACKComics #AmarChitraKatha #ValiantWomen #PragatiEVichaarLitFest #comics #indiancomics #art

Tuesday, November 27, 2018

Fourth Annual Tinkle Awards


Tinkle Awards 2018
Visit http://bit.ly/TinkleAwards and vote for your favourite Tinkle Toon, cover, issue and more! #comics #awards #tinkle #magazine #kids
Last Date - 10 January 2019

Sunday, July 2, 2017

TBS Planet Completes 1 Year


Rajeev Tamhankar (Founder, TBS Planet Comics) - "This has been a very special moment for us! TBS Planet Comics just turned 1. And we celebrated the occasion with our employees, their parents and the Mayor of Jabalpur. The event was followed by cake-cutting, dinner and our Quarterly and Annual employee awards."



Superhero of the Quarter Award (January-March) 2017 - Pawan Kulkarni
Superhero of the Quarter Award (April-June) 2017 - Salil Kolhe
Superhero of the Year 2016-17 Award - Pallavi Kulkarni

Thursday, April 13, 2017

Interview with Superfan Supratim Saha

नागपुर में रह रहे सुप्रतिम साहा का नाम भारतीय कॉमिक्स प्रेमियों के लिए नया नहीं है। सुप्रतिम भारत के बड़े कॉमिक्स कलेक्टर्स में से एक हैं, जो अपने शौक के लिए जगह-जगह घूम चुके हैं। कहना अतिश्योक्ति नहीं, ऐसे सूपरफैंस की वजह से ही भारतीय कॉमिक्स उद्योग अभी तक चल रहा है। पहले कुछ कॉमिक कम्युनिटीज़ में इनका अभूतपूर्व योगदान रहा और समय के साथ ये अपने काम में व्यस्त हो गए। हालांकि, अब भी कुछ कॉमिक्स ग्रुप पर सुप्रतिम दिख जाते हैं। ये मृदुभाषी और सादा जीवन व्यतीत करने में विश्वास करते हैं, इनके बात करने और वाक्य गढ़ने का तरीका मुझे बहुत भाता है इसलिए साक्षात्कार के जवाब में मेल से भेजे इनके जवाबों को जस का तस रखा है। 

अपने बारे में कुछ बताएं?
सुप्रतिम - 80 के दशक में भारत के पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा में मेरा जनम हुआ। मैने अपनी स्कूलिंग अगरतला शहर से की। मैने इंजिनियरिंग की नागपुर शहर से और बॅंगलुर शहर मे कुछ टाइम जॉब करने के बाद मैने मास्टर्स की चेन्नई शहर मे, आज मैं नागपुर के एक कॉलेज मे वाइस प्रिन्सिपल के पद पे काम कर रहा हू. आज भी मैं रेगुलार कॉमिकस खरीदता हू और पढ़ता हु्। मुझे मालूम हैं मेरा यह जुड़ाव कॉमिक्स के साथ हमेशा  रहेगा. इस सफ़र मे मैं अपने कुछ दोस्तो का नाम लेना चाहूँगा जिन्होने हमेशा मेरा साथ निभाया, बंटी फ्रॉम कोलकाता, संजय आकाश  दिल्ली से, गुरप्रीत पटियाला से, और बहत सारे दोस्त, वरुण ,मोहित, महफूज़ ,ज़हीर,विनय,अजय ढिल्लों  जिन्हे मैं ऑनलाइन मिला और इन सब से भी मेरी काफ़ी अच्छी दोस्ती हैं। सबके नाम शायद मैं यहा लिख नही पाया पर  मैं सबका आभारी हूँ जिन्होने इस सफ़र पे मेरा साथ निभाया। 

कॉमिक्स कलेक्शन का आपका सफर कैसे शुरू हुआ?
सुप्रतिम - मेरे कॉमिक्स पढ़ने की अगर बात करे तो ये शुरुवात हुई थी 1991-92 के आसपास। उन दिनों मैं क्वार्टर में रहता था और हर एक  घर से बटोर के जो कॉमिक्स मुझे मिलते थे उनमे से ज़्यादा तर या तो टिनटिन होते थे या फिर इंद्रजाल कॉमिक्स।  हिंदी कॉमिक इंडस्ट्री से मैं जुड़ा 1994 में जब मेरे एक राजस्थानी मित्र ने मुझे दो कॉमिक्स दी, वो दो कॉमिक्स थे डॉ नो और उड़ती मौत। राज कॉमिक्स और साथ ही अन्य हिंदी  कॉमिक्स के साथ मैं इन्ही दो कॉमिक्स की वजह से जुड़ा। 

अब तक कॉमिक्स के लिए कहाँ-कहाँ घूम चुके हैं?
सुप्रतिम - कॉमिक्स के लिए ट्रेवल करना मैंने शुरू किया सन 2009 से, यह वो समय था जब मैं बैंगलोर में था.बैंगलोर के अनिल बुक शॉप से बहत सारी कॉमिक्स मैंने रिकलेक्ट की.इसको छोड़के मैंने सबसे ज़्यादा कॉमिक्स कलेक्ट की नागपुर से। इस शहर ने मुझे ऑलमोस्ट 1500 + कॉमिक्स दी जिनमे मैक्सिमम दुर्लभ कॉमिक्स थे। इन 8 सालो में मैंने दिल्ली, नागपुर, कोलकाता, हैदराबाद, बैंगलोर, चेन्नई, पटियाला, अम्बाला, अगरतला जैसे शहरो से भी कॉमिक्स ली। दिल्ली शहर में दरीबा कलां के गोडाउन  से भी मैंने 1000+ कॉमिक्स ली।  इन दो शहर को छोड़के हैदराबाद शहर में भी मुझे 300+ विंटेज डायमंड कॉमिक्स मिलें। ऐसी कॉमिक्स जो की 35 साल से भी अधिक पुराने हैं,जैसे की लंबू मोटू ,फौलादी सिंह ,महाबली शाका ,मामा भांजा और वॉर सीरीज वाली कॉमिक्स। इन सब को छोड़के मेरे पास बंगाली कॉमिक्स भी है भारी संख्या में, करीबन 500 ,जिनमे पिछले 60-80 साल पुराने कॉमिक्स भी हैं। मैं आज भीं रेगुलर कॉमिक्स लेता हु हिंदी बंगाली इंग्लिश में। 

पहले के माहौल और अब में क्या अंतर दिखते हैं आपको?
सुप्रतिम - पहले के माहौल में कॉमिक्स एक कल्चर हुआ करता  था, आजकल कॉमिक्स तो दूर की बात हैं किताबों को पढ़ने के लिए भी पेरेंट्स बच्चो को प्रोत्साहित नहीं करते।  विडियो गेम्स केबल टीवी आदि तो मेरे बचपन में भी आराम से उपलब्ध थे ,पर इन सबके बावजूद अगर हर दिन खेलने नहीं गए, तैराकी नहीं की तो घर पे डांट पड़ती थी। आजकल कॉमिक्स,खासकर के कोई भी "रीजनल " फ्लेवर की कॉमिकस को पढ़ना लोगो के सामने खुदको हास्यास्पद करने जैसा हैं। यही वजह हैं की सिर्फ वही लोग देसी कामिक्से पढ़ते हैं जिनमे रियल पैशन हैं, वरना मंगा और वेस्टर्न कॉमिक्स को ही सीरियस कॉमिक्स समझने और ज़ाहिर करने वालो की भी कमी नहीं हैं। एक कॉमिक बुक फैन होने के नाते मुझे सभी कामिक्से देसी  या विदेसी  अच्छे  लगते  है पर भाषा के नाम पे यह भेदभाव आज बहत ज़्यादा प्रभावशाली हैं। 

अपने शहर के बारे में बताएं।
सुप्रतिम - मेरा जन्म भारत के पूर्वोत्तर मे स्थित अगरतला शहर मे हुआ। गौहाटी के बाद ये पूर्वोत्तर के सात राज्यो मे दूसरा प्रमुख शहर भी हैं। बॉर्डर से सटे होने की वजह से यहा बीएसएफ भी कार्यरत हैं जिनमे से काफ़ी लोग हिन्दी भाषी है। साथ ही साथ ओ एन जी सी होने के कारण से हिन्दी भाषी लोग काफ़ी मात्रा मे मौजूद भी है। ज़ाहिर सी बात हैं की इस वजह से हिन्दी कॉमिक्स शुरू से ही यहा रहते लोगो का मनोरंजन करती आ रही हैं. समय के साथ साथ हिन्दी कॉमिक्स का क्रेज़ यहा काफ़ी कम हो चुका हैं पर आज भी मैं घर जाता हू तो भूले भटके एक आधा दुकान मे कुछ दुर्लभ कॉमिकसे खोज ही निकलता हूँ। 

आप अक्सर स्केच बनाते हैं, स्केचिंग का शौक कब लगा?
सुप्रतिम - स्केचिंग का  शौक  मुझे कॉमिक्स से नही  लगा। उन दिनो (1993) जुरासिक पार्क फिल्म का क्रेज़  सबके सिर चढ़के बोल रहा था , मेरे घर पे एक किताब थी जिसका नाम था "अतीत साक्षी फ़ॉसिल" उस किताब मे डाइनॉसॉर के बारे मे जानकारियाँ थी और अनूठे चित्र थे, मैं दिन भर उन्ही के चित्र कॉपी करने के कोशिश मे लगा रहता था। कुछ एक बार जब मेरे इन प्रयासो को लोगो ने मुर्गी,बतक के चित्र के रूप मे शिनाख्त की तो मैं फिर कॉमिक स्टार्स के चित्र बनाने लगा। बचपन मे सबसे ज़्यादा चित्र मैने भेड़िया के बनाए (प्री-1997) ,नागराज के चित्र बनाते हुए मैं काई बार पढ़ाई के वक़्त पकड़ा भी गया। आज कल समय मिलता नही हैं पर उत्सुकता पहले जैसी ही हैं।

आपके हिसाब से एक अच्छी कॉमिक्स के क्या मापदण्ड हैं? 
 सुप्रतिम - एक अच्छी  कॉमिक्स का मापदंड किसी एक विषय पे निर्भर नहीं करता, पर पहला मापदंड यह हैं की उसके चित्र और कहानी में से कोई भी एक पहलु जोरदार होनि चाहिये। हालाकी चित्र अव्वल दर्जे का हो तो सबसे पहले ध्यान आकर्षित करता है। पर ऐसे कॉमिक भी होते हैं जिनमे चित्र का योगदान कम होता है और कहानी इतनी ज़बरदस्त होती है की दिल को छु जाती हैन.जैसे की "अधूरा प्रेम".वैसे ही काफ़ी ऐसे कॉमिक्स भी होते हैं जिनके साधारण से कहानी को
चित्रकला के वजह से एक अलग ही आकर्षण मिलता हैन. मनु जी के द्वारा बनाए गये सभी परमाणु के कॉमिक्स इस श्रेणी मे आते हैं. आज भी अगर कॉमिक्स के क्वालिटी की बात आए तो आकर्षक चित्रकला ही वो प्रमुख माध्यम हैं जिससे आप एक कॉमिक्स से प्रभावित होते हैं। 

अपनी पसंदीदा कॉमिक्स, लेखक, कलाकार और कॉमिक किरदारों के बारे में बताएं। 
सुप्रतिम - मेरी पसंदीदा कॉमिक्स, किरदार के हिसाब से देखा जायें तो  होंगे ग्रांड मास्टर रोबो, ख़ज़ाना सीरीज़, भूल गया डोगा, टक्कर, खरोंच, 48 घंटे सीरीज़, लाश कहा गयी, चमकमणी, महारावण सीरीज़, अग्नि मानव सीरीज़, प्रोफ शंकु सीरीज़ आदि। अनुपम सिन्हा जी ,सत्यजीत राय,संजय जी मेरे प्रिय लेखक मे से हैं। प्रताप जी,अनुपम जी, मनु जी, डिगवॉल जी, ललित शर्मा जी, चंदू जी, सुजोग ब्न्दोपध्यय जी, अभिषेक चटेर्ज़ी, मलसुनी जी, मयुख चौधरी जी,गौतम कर्मकार
जी मेरे प्रिय कलाकार हैं।  ध्रुव, नागराज, परमाणु, डोगा, भेड़िया, प्रोफेसर शंकु, कौशिक, फेलूदा, महाबली शाका,फॅनटम, घनादा मेरे फ़ेवरेट क़िरदार हैं। 

बचपन की कोई हास्यास्पद घटना, याद बांटिये। 
सुप्रतिम - बचपन मे मेरे एक राजस्थानी मित्र राकेश कुमार मीना ने मुझे पहली बार राज कॉमिक से अवगत कराया। उसीके साथ हुआ एक वाक़या मुझे याद हैं जिसे हास्यास्पद घटना कहा जा सकता हैं। राकेश और मेरे पास जितनी भी कॉमिकस थी, उनको हम एक्सचेंज करके पढ़ते थे। एक बार हुआ यह की मुझे उससे दो कॉमिक से लेनी थी, जिनमे से एक थी इंद्र की और दूसरी थी ताउजी कि, अब हुआ यह की यह दोनो कॉमिक आठ रुपये के थे। जब मैने उसे अपने दो कॉमिकसे दी तो उसने मुझे कहा की तेरे दो कॉमिक्सो का मूल्य पन्द्रह रुपये हैं तो मैं तुझे मेरे दो कॉमिक, जो की सोलह रुपये के हैं, तुझे नही दे सकता। उसके इस बिज़नेस माइंडनेस की जब भी कल्पना करता हू तो आज 22 साल बाद यह घटना हास्यास्पद ही लगता हैं। दूसरी घटना भी 1995 की ही हैं, मैं अपने फॅमिली के साथ जा रहा था बन्गलोर्, हम कलकत्ता  मे ठहरे हुए थे और मशहूर कॉलेज स्ट्रीट से होके गुज़र रहे थे की मुझे एक दुकान मे कॉमिकस दिखि। मेरे कहने पे पापा ने मुझे दो कॉमिकसे दिलवाई, एक थी “बौना शैतान” और दूसरी “ताजमहल की चोरिं “मुझे हैरत हुई जब दुकानदार ने पापा से 6 ही रुपये माँगे, और मुझे पहली बार मालूम पड़ा की सेकेंड हॅंड बुक्स किसे कहते है। बचपन के यह मासूम किससे सही मायने मे हास्यास्पद ना सही,होठों पे मुस्कान ज़रूर लाती हैं। 

बदलते समय के अनुसार कॉमिक्स प्रकाशकों को क्या सलाह देना चाहेंगे?
सुप्रतिम - देसी कॉमिक्स के दौर को मैं कूछ किस्म मे बाँटना चाहूँगा. 1940-1970 के दशक मे बंगाल मे वीदेसी कॉमिक्स के अनुकरण मे काफ़ी विकसित कॉमिकस बनी, जिनमे सायबॉर्ग जैसे कॉन्सेप्ट्स काम मे लाए गये। 1970 से हिन्दी कॉमिक इंडस्ट्री मे भी सहज सरल चित्रो के साथ कॉमिकसे आई। 1980 से कॉमिकसे काफ़ी विकसित हो गई और 1990-2000 तक हिन्दी कॉमिक इंडस्ट्री का सुनेहरा दौर रहा। 2000 के बाद की बात करें तो डिजिटल फॉरमॅट्स के बदौलत हिन्दी कॉमिक इंडस्ट्री मे काफ़ी चेंजस आयें। आज भी कुछ कॉमिक्स मे जैसे की बंगाली कॉमिक्स इंडस्ट्री मे मैनुअल कलरिंग का प्रयोग बखूबी से किया जाता हैं। समय के साथ कुच्छ इंडस्ट्रीस बदल गये और कूछ ने अपना पुराना स्टाइल बरकरार रखा, पर एक अच्छी कॉमिक्स को आज भी फैंस जैसे  भाँप लेते है। बदलते समय में स्टाइल बदला होगा पर अच्छे कॉमिक्स का मापदंड वही हैं जो पहले से थे। प्रकशको से मेरी बीनति रहेगी की यह पॅशन ही हैं जो एक कॉमिक को आकर्षक बनाती हैं ना की नयी तकनीक. कॉमिक बनाते वक़्त उन मौलिकताओ का ध्यान रखे जिनकी वजह से कॉमिक्स ने हमारे बचपन को इतने रंगो मे रंगा। 

कॉमिक्स पाठकों के लिए आपका क्या सन्देश है?
सुप्रतिम - कॉमिक्स पाठक बंधुओ के लिए मैं यही बोलना चाहूँगा की आप मे से काफ़ी लोग अभी किसी कारणवश कॉमिक्स से दूर होते जा रहे हैं, कोशिश  करिए की अपने आनेवाले पीढ़ी को आप प्रोत्साहित करे कॉमिक्स पढ़ने के लिए और खुद भी पढ़ें और खरीदें। 

- मोहित शर्मा ज़हन

Friday, September 30, 2016

Mrinal Rai, Jazyl Homavazir & Akshay thank fans after ICFA 2016


Indian Comics Fandom Awards 2016 #update - Mrinal Rai (Best Cartoonist), Jazyl Homavazir (Best Webcomic: The Beast Legion, Silver: Best Cartoonist) and Akshay Katnaur (Best Webcomic Bronze: The Last Ancients) thank their fans-friends for support (nominations and voting).


Wednesday, November 26, 2014

Results - Indian Comics Fandom Awards 2014



Indian Comics Fandom Awards 2014 Winners

*) - Best Blogger – Prashant Priyadarshi

*) - Best Cartoonist – Dheeraj ‘Dkboss’ Kumar

*) - Best Colorist – Ajay Thapa
*) - Best Reviewer – Neel Eeshu
*) - Best Comics Collector – Arun Prasad
*) - Best Fanfiction Writer – Karan Virk
*) - Best Fan Artist – Tadam Gyadu



Silver Positions (Runner-ups) – Indian Comics Fandom Awards 2014

*) - Blogger – Deven Pandey

*) - Cartoonist – Vineed Vijayan Ritchie

*) - Colorist – Jyoti Singh
*) - Reviewer – Mukesh Gupta
*) - Comics Collector – Abhinav Dutta
*) - Fanfiction Writer – Avijit Misra (Avi)
*) - Fan Artist – Amit Albert


Bronze Positions (Rank # 3) – Indian Comics Fandom Awards 2014

*) - Blogger – Anupam Agarwal 

*) - Cartoonist – Soumendra Majumder 

*) - Colorist – Mangesh Suryawanshi
*) - Reviewer – Rahul Kochar
*) - Comics Collector – Mehfooz Ali
*) - Fanfiction Writer – Frank Knot (Rahul Kumar)
*) - Fan Artist – Navneet Singh & Harish Atharv Thakur [Tie]



Indian Comics Fandom - Hall of Fame 2014

*) - Sanjay Singh
*) - Dheeraj Dkboss Kumar
*) - Mayank Sharma
*) - Arjun Mediratta 

Nominations by from dozens of popular active-defunct communities, groups and discussion  boards dedicated to Indian Comics. Total 262 nominations in 8 categories this year. 2013 winners of a category not included in the same category this year.

P.S. Don't forget to follow these Champions, Runner-ups and all other nominated awesome talents & checkout their profiles on various websites. Couple of Non-Poll categories results later this year.

#IndianComicsFandom #FreelanceTalents #ICFAwards

Friday, November 21, 2014

Indian Comics Fandom Awards 2014 (Voting Open)

Namastey! Third edition of ICF Awards with new categories and format. Voting Now Open for Indian Comics Fandom Awards 2014, Vote for your favorite contender in the following categories.

4. Best Reviewer / Critic – http://www.opinionstage.com/polls/2233138
5. ICF Hall of Fame 2014 – http://www.opinionstage.com/polls/2233172
7. Best Comics Collector – http://www.opinionstage.com/polls/2233183
8. Best FanFiction Writer - http://www.opinionstage.com/polls/2233120
Deadline - 26 November 2014 (3 PM IST)
*Results of 2 non-poll categories categories - Moment of the Year 2014 and Best Cosplayer (on Indian Comics) will be declared soon. 
**Last Year winners not included in the nominations this year.

Sunday, December 29, 2013

Vishnu Madhav - Best Cartoonist :)

Vishnu Madhav's Vote appeal after he was nominated for Best Cartoonist Award @ Indian Comics Fandom Awards 2013
....& his grand celebration after victory. :D

Indian Comics Fandom Awards 2013 - Final Standings



*) - Best Cartoonist  
1. Vishnu Madhav
2. Kajal Kumar
3. Rahul Sharma & Prakash Bhalavi (tie).

*) - Best Comics Collector 
1. Sanjay Singh
2. Mohnish Kanojia
3. Sushant Mittal

*) - Best Blogger 
1. Mohit Sharma 
2. Kapil Chandak 
3. Sanjay Singh

*) - Best Fan Artist 
1. Jyoti Singh 
2. Saket Kumar 
3. Sumit Sinha

*) - Best Fanfic Author 
1. Mohit Sharma, 
2. Soumya Das 
3. Saurab Mehra

*) - Best Colorist 
1. Inder Jeet Bhanoo 
2. Dheeraj Dkboss Kumar 
3. Abhishek Gautam

*) - Best Reviewer/Critic 
1. Youdhveer Singh
2. Ajay Dhillon 
3. Mohit Sharma

*) - ICF Hall of Famers (2013) 
Fenil Sherdiwala, Youdhveer Singh, Mohit Sharma, Ajay Dhillon.

*107 creatives nominated in 7 categories, Best Reviewer Poll  was done few days before the event. Artwork by Mr. Ashish Khare.

Indian Comics Fandom - Hall of Fame 2013


Indian Comics Fandom Hall of Fame (2013), nominated - 10 & chosen by online public poll.


*) - Ajay Dhillon 

*) - Mohit Sharma 

*) - Youdhveer Singh