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Sunday, November 29, 2020

प्राण जी पर किताब (टिप्पणी)

 

चाचा चौधरी , साबू, बिल्लू, पिंकी और श्रीमती जी का नाम किसने नहीं सुना !
ख़ुशी इस बात की है कि इनके रचियता यानि भारत देश को स्ट्रिप कॉमिक्स देने वाले पद्मश्री  स्वर्गीय  श्री प्राण साहब की बायोग्राफी जब खुद इसकी लेखिका और प्राण साहब की धर्मपत्नी श्रीमती आशा जी के नोट और हस्ताक्षर के साथ मिले! 
धन्यवाद आदरणीय आशाजी ! इस अनुपम कृति के लिए ! आपने जिस भाव से इसे लिखा है मानो मैं प्राण साहब पर बनी फिल्म देख रहा हूँ ! आपने भावों से भरी प्याली में सरल भाषा के चम्मच से आत्मीयता घोल दी  है  ! उनके इतने भावुक, प्रेरक और ज़बरदस्त व्यक्तित्व को पढ़ कर मैं उनका और बड़ा प्रशंसक हो गया ! 
विशेषकर  चमचमाती राजदूत से पार्लियामेंट का चक्कर वाली बात ! आपकी कसूर ट्रिप और पुश्तैनी घर की बात हो ! गाज़ियाबाद से आये छोटे बच्चे का किस्सा या विदेश से आये जॉन लेंट ! सब कुछ अद्भुत है ! आपको बहुत बहुत धन्यवाद प्राण साहब के व्यक्तित्व से हम सभी को मिलवाने के लिए ! आशा है आपसे इस जीवन में एक बार ज़रूर भेट होगी ! 
दोस्तों ! भारत के बच्चों को अपने देसी कार्टून देने वाले इस महान आर्टिस्ट की जीवनी मेरी नज़र में प्राण  ज़रूर पढ़िए , आशा प्राण द्वारा लिखी गई इस किताब के माध्यम से जिसने भारत के बच्चों के बचपन में बेतहाशा खुशियाँ दी थें तब जब टीवी दुर्लभ था , मोबाइल नहीं था और इन्टरनेट जन्मा भी नहीं था ! 
आज भी याद है मुझे ! कम्प्यूटर शब्द मैंने सबसे पहले चाचा चौधरी की कॉमिक्स में ही पढ़ा था जहाँ नीचे फुटर में लिखा होता था कि चाचा चौधरी का दिमाग़ कम्प्यूटर से भी तेज़ चलता है !
लिंक 
समीर शर्मा , इंदौर  
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Wednesday, August 6, 2014

कार्टूनिस्ट प्राण को पीढ़ियों के बचपन की श्रद्धांजलि (कविता) - मोहित शर्मा ज़हन



जिस राह कोई चला नहीं,
उस पर कदम बढ़ाये,
आम लोगो के बीच से ख़ास किरदार उठाये,
फैंटम-मैंड्रेक और फैंटसी की लथ छुड़वाई,
कितनी ही किवदंती याद करवाई,
जाने कैसे सहजता से कथाओं में अपना देसीपन भर लाये। 

दशको तक चाचा क्या पिंकी ऊँगली पकड़ चलाये,
भाषा की बंदिश को तोडा,
तरह-तरह बंदो को जोड़ा,
झूठी मिथको को झकझोरा,
बूढे, बच्चो और गृहणियों को पकड़ सुपरहीरो से करतब करवायें। 

आपका उदाहरण दें विस्मित किशोर आज तक कला में भविष्य बनायें,
मनोरंजन से जनचेतना की पूरी हुयी उनकी आशा,
ढाई साल के बच्चे से लेकर अर्द्धचेतन अधेड़ तक समझे उनकी भाषा। 
अरसो यूँ गुदगुदा कर आँखें नम करवायें,
लाखो चित्र, करोड़ों प्रशंषक,
आसमान को देखें एकटक,
चाचा जी के पापा को वापस बुलायें,
ताकि फिर से वो अपना एक स्वप्निल जगत बनाये,
और फिर से कितनी पीढ़ियों के बचपन में प्राण फूँक जायें। 

आज हमारे बीच प्रख्यात कलाकार, कथाकार, कार्टूनिस्ट और जनसेवक श्री प्राण कुमार शर्मा जी नहीं रहे। अनेको देसी-विदेशी सम्मानों (जिनमे प्रमुख है इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ कार्टूनिस्टस द्वारा लाइफ टाइम अचीवमेंट (2001), कॉमिक कॉन इंडिया का लाइफ टाइम अचीवमेंट, लिम्का बुक ऑफ़ रिकार्ड्स के पीपल ऑफ़ दी ईयर सूची में सम्मिलित (1995), उनकी कॉमिक 'हम एक है' (रमन) का तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा राष्ट्रीय विमोचन (1983), अमेरिका के इंटरनेशनल म्यूज़ियम ऑफ़ कार्टून आर्ट में उनकी कला का स्थाई प्रदर्शन) के अलावा उनकी सबसे बढ़ी उपलब्धि है 1960 के दशक से लेकर अब तक कई पीढ़ियों पर एक सकारात्मक असर डालना और मुझे विश्वास है आगे भी उनका अमर काम ऐसा करता रहेगा। रोज़मर्रा के जीवन से ऐसे किरदार उठा लाये जिन्होंने आयातित विदेशी मनोरंजन के बाज़ार मे एक बड़ा हिस्सा ले लिया। उनकी आत्मा को शांति मिले और उनके काम से यूँ ही लोग प्रेरित होते रहे। प्राण जी को मेरा शत-शत नमन! 


- मोहित शर्मा (ज़हन)